अमेरिका में दर्ज मुकदमे से मचा हड़कंप, WhatsApp की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पर उठे सवाल
दुनियाभर में करोड़ों लोग WhatsApp को सुरक्षित और प्राइवेट मैसेजिंग ऐप मानते हैं, लेकिन अब उसकी प्राइवेसी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका में दर्ज एक नए मुकदमे में Meta पर आरोप लगाया गया है कि वह WhatsApp यूजर्स को मैसेज प्राइवेसी को लेकर गुमराह कर रही है। शिकायत में कहा गया है कि WhatsApp के मैसेज पूरी तरह निजी नहीं हैं और कंपनी उन्हें स्टोर व एक्सेस कर सकती है।
हालांकि Meta ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, लेकिन यह मामला दुनियाभर के यूजर्स के लिए चिंता का विषय बन गया है।
WhatsApp यूजर्स से क्या वादा करता है Meta?
WhatsApp खुद को एक सुरक्षित और प्राइवेट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म बताता रहा है। कंपनी का दावा है कि उसके ऐप में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन मौजूद है, जिससे मैसेज सिर्फ भेजने और पाने वाले ही पढ़ सकते हैं।
हर चैट में यह लिखा होता है कि “WhatsApp भी आपके मैसेज नहीं देख सकता।” यही भरोसा WhatsApp की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है, लेकिन अब इसी दावे को अदालत में चुनौती दी गई है।
मुकदमे में क्या लगाए गए हैं आरोप?
शिकायत के मुताबिक Meta और WhatsApp यूजर्स के मैसेज को स्टोर कर सकते हैं और उनका एनालिसिस भी संभव है। आरोप है कि कंपनी के पास तकनीकी रूप से यूजर कम्युनिकेशन तक पहुंचने की क्षमता मौजूद है।
मुकदमे में कहा गया है कि WhatsApp को पूरी तरह प्राइवेट बताकर दुनियाभर के यूजर्स को गुमराह किया गया। इस केस में ऑस्ट्रेलिया, भारत, ब्राजील, मैक्सिको और साउथ अफ्रीका के यूजर्स भी शामिल बताए जा रहे हैं।
व्हिसल ब्लोअर का जिक्र और बड़ा दावा
मुकदमे में कुछ व्हिसल ब्लोअर्स का भी जिक्र किया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर WhatsApp की अंदरूनी कार्यप्रणाली उजागर की है। हालांकि उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
आरोप है कि WhatsApp के कर्मचारी यूजर्स के मैसेज तक पहुंच सकते हैं। यही दावा इस पूरे केस को और ज्यादा गंभीर बना देता है।
Meta ने क्यों बताया आरोपों को बेबुनियाद?
Meta ने सभी आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। कंपनी का कहना है कि WhatsApp पिछले 10 सालों से Signal Protocol पर आधारित एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल कर रहा है।
Meta के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने कहा कि यह मुकदमा निराधार और कल्पना पर आधारित है। कंपनी ने साफ किया है कि वह इस केस का मजबूती से सामना करेगी और आरोप लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है।
क्यों अहम है यह मामला?
WhatsApp पर लोग अपनी निजी बातें, बिजनेस चैट, बैंकिंग और जरूरी जानकारियां साझा करते हैं। ऐसे में अगर प्राइवेसी पर सवाल उठते हैं तो यह करोड़ों यूजर्स के भरोसे को प्रभावित कर सकता है। आने वाले समय में अदालत का फैसला टेक कंपनियों की प्राइवेसी पॉलिसी पर बड़ा असर डाल सकता है।
