डोलकुमार निषाद@डभरा/सक्ति-:-जिले में मनरेगा कार्यों में अनियमितता पाए जाने पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए तकनीकी सहायक की सेवा समाप्त कर दी है। कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के निर्देशन में जिला पंचायत सीईओ वासु जैन ने यह कार्रवाई की हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 7 जनवरी 2026 को दैनिक समाचार पत्र में “मनरेगा में 19.28 लाख की अनियमितता, काम शून्य, भुगतान पूरा” शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन हरकत में आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तर के अधिकारियों की टीम गठित कर जांच कराई गई।

जांच के दौरान जनपद पंचायत डभरा अंतर्गत ग्राम पंचायत गोबरा में वर्ष 2023 में मनरेगा योजना के तहत स्वीकृत कार्यों—समुदाय के लिए शाखा नहर निर्माण, छुहीपाली माइनर के पुनरुद्धार एवं सिंघरा वितरक कार्य—का भौतिक सत्यापन किया गया। मौके पर निरीक्षण में पाया गया कि संबंधित कार्य वास्तविक रूप से कराए ही नहीं गए, जबकि उनके नाम पर पूर्ण भुगतान कर दिया गया था।

इस पर तकनीकी सहायक संजय धीरहे को कार्यालयीन पत्र के माध्यम से आरोप पत्र जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्हें अंतिम अवसर देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

संजय धीरहे द्वारा प्रस्तुत उत्तर में स्वयं यह स्वीकार किया गया कि संबंधित कार्य नहीं कराए गए थे तथा गलत तरीके से मूल्यांकन किया गया। यह कृत्य उनके पदीय दायित्वों के प्रति गंभीर लापरवाही और वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में पाया गया।

प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ संविदा सेवा भर्ती नियम 2012 के तहत तकनीकी सहायक संजय धीरहे की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया।

प्रशासन का सख्त संदेश

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासन की योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी ऐसी अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी तेज

इस घटना के बाद जिले में मनरेगा सहित अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी और सख्त कर दी गई है, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचे और पारदर्शिता बनी रहे।

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