मुंगेली//मुंगेली शहर में नियम-कानून अब सिर्फ फाइलों की शोभा बनकर रह गए हैं, जबकि ज़मीन पर “जो चाहे सो करो” नीति पूरे शबाब पर है। प्रशासन की बार-बार चेतावनी के बावजूद क्षेत्र में अवैध निर्माण का खेल खुलेआम जारी है—और हैरानी की बात यह है कि चेतावनी देने वाले ही इसे होते हुए देख रहे है

मामला बालानी चौक का है, जहां एक दुकान का निर्माण ऐसे स्थान पर किया जा रहा है जिसका न तो कोई स्वीकृत नक्शा है और न ही खसरा नंबर का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह निर्माण मुहल्ले से नदी की ओर जाने वाले नाले के ऊपर ही खड़ा किया जा रहा है—यानी भविष्य की संभावित आपदा की नींव आज ही रखी जा रही है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस अवैध निर्माण की मौखिक शिकायत प्रशासन से की, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन का “मीठा झुनझुना” थमा दिया गया। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चेतावनी दी गई, जो शायद निर्माणकर्ता के लिए “अनुमति पत्र” से कम नहीं लग रही।
जब इस विषय पर प्रशासन से चर्चा की गई, तो उनका कहना था कि “हम पहले भी चेतावनी दे चुके हैं, अब लीगल नोटिस दिया जाएगा, और उचित जवाब नहीं मिलने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
अब सवाल यह उठता है कि जब अवैध निर्माण आंखों के सामने हो रहा है, तो “नोटिस” का इंतजार क्यों? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है ताकि बाद में जांच कमेटी बैठाकर जिम्मेदारी तय की जा सके?
नाले पर हो रहा यह निर्माण न केवल नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि भविष्य में जलभराव, गंदगी और बाढ़ जैसी समस्याओं को भी न्योता दे रहा है। मुहल्ले के लोगों को डर है कि बारिश के मौसम में यह अवैध ढांचा उनके लिए मुसीबत का कारण बन सकता है।
