जांजगीर/सक्ती @avdhesh-tandan बिर्रा थाना क्षेत्र एक बार फिर पत्रकारों पर बढ़ते हमलों को लेकर सुर्खियों में है। लगातार हो रही घटनाओं ने इस क्षेत्र को पत्रकारों के लिए असुरक्षित बना दिया है। कुछ ही महीनों में करही में एक पत्रकार की हत्या, करनौद में रेत माफिया द्वारा हमला और अब बिर्रा में झोलाछाप डॉक्टर द्वारा पत्रकार को बंधक बनाने की घटना ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अवैध क्लिनिक की कवरेज करने गए थे पत्रकार जानकारी के अनुसार, निजी न्यूज चैनल से जुड़े पत्रकार गुरुवार शाम बिर्रा थाना क्षेत्र के पटेल नामक झोलाछाप डॉक्टर के क्लिनिक पहुंचे थे। इस क्लिनिक को कुछ महीने पहले ही प्रशासन ने सील किया था, लेकिन डॉक्टर ने नियमों को ताक पर रखकर दोबारा अवैध रूप से क्लिनिक शुरू कर दिया था। जैसे ही पत्रकार ने कैमरा ऑन कर कवरेज शुरू की, डॉक्टर भड़क उठा। बताया जाता है कि उसने पत्रकार को कमरे के भीतर बंद कर दिया और अपने साथियों को बुलाकर बदसुलुकी कर मारपीट करने लगे। हमलावरों ने पत्रकार का मोबाइल और कैमरा छीनने की भी कोशिश की। पत्रकार ने किसी तरह यह जानकारी अन्य पत्रकार साथियों को दी।

एसपी के हस्तक्षेप से बची पत्रकार की जान

घटना की सूचना पुलिस अधीक्षक तक पहुंची तो पुलिस अधीक्षक ने तत्काल बिर्रा थाना प्रभारी को कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पत्रकार को झोलाछाप डॉक्टर के चंगुल से छुड़ाया। घटना स्थल पर हुई यह पूरी कार्रवाई पुलिस की मौजूदगी में हुई, जिससे साफ है कि मामला बेहद गंभीर है।

तीन महीने, तीन हमले, पत्रकारों में भय और आक्रोश

यह घटना बिर्रा थाना क्षेत्र में पत्रकारों पर हुआ तीसरा बड़ा हमला है। करही गांव में पत्रकार की हत्या हुई थी। इसके बाद करनौद गांव में भी रेत माफिया ने एक अन्य पत्रकार पर जानलेवा हमला किया था। अब बिर्रा में झोलाछाप डॉक्टर की गुंडागर्दी ने पत्रकारों में दहशत और नाराज़गी दोनों बढ़ा दी है।

स्थानीय पत्रकार बोले बिर्रा अब असुरक्षित जोन

स्थानीय पत्रकारों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि बिर्रा थाना क्षेत्र अब पत्रकारों के लिए खतरनाक जोन बन चुका है। बार-बार होने वाली घटनाओं के बावजूद दबंगों पर कड़ी कार्रवाई होने से असामाजिक तत्वों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि अगर यही हाल रहा तो पत्रकार अब सच्चाई दिखाने से पहले अपनी सुरक्षा को लेकर डरेंगे। यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला है।

पत्रकार संगठनों का विरोध, दोषी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग

घटना के बाद जिले के पत्रकार संगठनों ने एकजुट होकर विरोध जताया है। उन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठनों का कहना है कि पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पत्रकार प्रतिनिधिमंडल जल्द ही पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और भविष्य में पत्रकार सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाने की मांग करने की तैयारी में है।

कब तक यूं ही असुरक्षित रहेंगे पत्रकार..?

लगातार तीन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि बिर्रा थाना क्षेत्र में पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। अगर प्रशासन ने अब भी ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। पत्रकारों का कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई और सुरक्षा गारंटी चाहिए।

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