वादे हवा-हवाई, जमीन पर सिर्फ मौत और इंतजार” न 100 बिस्तर अस्पताल, न 500 बच्चों का स्कूल–आखिर जवाबदेह कौन.?“वादे कागजों में, जमीन पर मौत: श्रमिक दिवस पर बड़ा सवाल”
डोलकुमार निषाद@सक्ती/डभरा:-
जहाँ एक ओर पूरा देश श्रमिक दिवस पर मजदूरों के सम्मान में पोस्ट और भाषणों की बौछार कर रहा है, वहीं डभरा क्षेत्र के श्रमिक आज भी दर्द, उपेक्षा और अन्याय के बीच जीने को मजबूर हैं। सोशल मीडिया पर संवेदनाएं जताकर जिम्मेदारी पूरी कर लेने वाले नेताओं और अधिकारियों के बीच ज़मीन पर हालात बेहद कड़वे हैं।

14 अप्रैल 2026: वो काला दिन जिसने सब कुछ बदल दिया.!
डभरा ब्लॉक के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट ने 25 श्रमिकों की जान ले ली, जबकि दर्जनों मजदूर आज भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ परिवारों को उजाड़ा, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता को भी बेनकाब कर दिया।
मुआवजा या जिम्मेदारी से बचने का बहाना.?
कंपनी प्रबंधन मृतकों और घायलों को मुआवजा देकर अपनी पीठ थपथपा रहा है, लेकिन बड़ा सवाल ये है की—क्या एक श्रमिक की जान की कीमत सिर्फ कुछ लाख रुपये है?
या फिर सरकार और कंपनी की इससे कहीं ज्यादा जिम्मेदारी बनती है?
वादे बड़े, जमीनी हकीकत शून्य.!
वेदांता द्वारा एथेना पावर लिमिटेड के अधिग्रहण के दौरान पर्यावरण मंत्रालय के आदेश (18 अक्टूबर 2023) में स्पष्ट तौर पर प्रभावित क्षेत्र में 100 बिस्तर अस्पताल और 500 छात्रों के लिए स्कूल खोलने का वादा किया गया था।
लेकिन आज तक ये वादे सिर्फ कागजों में कैद हैं।
आदेशों की अवहेलना, श्रमिक अब भी ठगे हुए.!
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लंबित भुगतान के आदेश की अनदेखी,, सक्ति कलेक्टर द्वारा पत्र लिखने के बाद भी मजदूरों को भुगतान नहीं
सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव.!
ये सब इस बात की गवाही देते हैं कि श्रमिकों के अधिकारों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
अगर अस्पताल होता, तो शायद बच जाती कई जानें..!
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते 100 बिस्तर का अस्पताल बन गया होता, तो इलाज में देरी नहीं होती और शायद इतनी बड़ी जनहानि टल सकती थी..।
अब वक्त है पोस्ट नहीं, मैदान में उतरने का.!
श्रमिक दिवस पर सिर्फ संदेश और पोस्ट से काम नहीं चलेगा। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और बुद्धिजीवियों को अब जमीनी स्तर पर संघर्ष करना होगा ताकि—
1;-100 बिस्तर का अस्पताल जल्द बने
2;- 500 छात्रों के लिए स्कूल की स्थापना हो
3;- श्रमिकों को उनका हक और सम्मान मिले..
यही होगी सच्ची श्रद्धांजलि.!
डभरा के श्रमिकों की पीड़ा को समझते हुए ठोस कदम उठाना ही उन 25 मजदूरों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जिन्होंने सिस्टम की लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकाई।
