अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू स्थायीकरण, वेतन वृद्धि और पे-रिवीजन की मांग पर आर-पार की लड़ाई, प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप
डोलकुमार निषाद@डभरा/सक्ती :– जिले के डभरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बाड़ादरहा स्थित डी.बी. पावर लिमिटेड में वर्षों से कार्यरत भू-विस्थापित श्रमिकों का सब्र आखिरकार टूटता नजर आ रहा है। करीब 15–16 वर्षों से कंपनी में सेवा दे रहे 314 भू-विस्थापित श्रमिकों ने अब अपने हक की लड़ाई को निर्णायक मोड़ देते हुए 10 जून से अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण हड़ताल और धरना-प्रदर्शन का बिगुल फूंक दिया है,,,।



श्रमिकों का आरोप है कि कंपनी की नींव मजबूत करने में वर्षों तक पसीना बहाने के बावजूद आज तक उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला, जबकि बार-बार केवल आश्वासन का “झुनझुना” थमाया जाता रहा। अब श्रमिकों ने साफ शब्दों में कहा है कि “हक चाहिए, सिर्फ भरोसा नहीं”।
“वादों की मिठास खत्म, अब आंदोलन का तेवर”
जानकारी के अनुसार, श्रमिक लंबे समय से स्थायीकरण, वेतन वृद्धि, पे-रिवीजन और अन्य सुविधाओं की मांग करते आ रहे हैं। करीब ढाई साल पहले भी श्रमिकों ने आंदोलन किया था, तब कंपनी प्रबंधन ने स्थायीकरण का भरोसा देकर आंदोलन खत्म करा दिया, लेकिन श्रमिकों का आरोप है कि वह भरोसा आज तक सिर्फ कागजों और बैठकों तक ही सीमित रहा।
यही वजह है कि अब नाराज श्रमिकों ने “आर-पार की लड़ाई” का मन बनाते हुए मोर्चा खोल दिया है। श्रमिकों का कहना है कि वर्षों तक कंपनी के लिए रीढ़ बनकर काम करने वालों को आज भी अस्थायी कर्मचारी जैसा व्यवहार झेलना पड़ रहा है।
श्रमिकों की प्रमुख मांगें:

- FTC कर्मचारियों को तत्काल स्थायी किया जाए
- नया वेतन पुनरीक्षण Pay Revision लागू किया जाए
- वर्तमान वेतन में सम्मानजनक वृद्धि और अन्य सुविधाएं लागू हों
“शांतिपूर्ण आंदोलन, लेकिन चेतावनी भी साफ:”
श्रमिकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन और प्रशासन ने जल्द कोई ठोस पहल नहीं की, तो यह शांतिपूर्ण धरना और उग्र रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह कंपनी प्रबंधन और प्रशासन की होगी।
“कंपनी के कामकाज पर असर संभव”
314 श्रमिकों के एकजुट होकर हड़ताल पर उतरने से डी.बी. पावर प्लांट के संचालन पर असर पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि प्रबंधन श्रमिकों की मांगों को गंभीरता से सुनता है या फिर एक और आश्वासन देकर मामला शांत करने की कोशिश होती है,,,।
