हाल ही में संगठन में मिली जिम्मेदारी, अब दुष्कर्म व एससी-एसटी एक्ट के मामले में नाम आने से बढ़ी राजनीतिक हलचल

डोल कुमार निषाद@डभरा/सक्ती :– छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में कांग्रेस संगठन से जुड़े एक पदाधिकारी का नाम गंभीर आपराधिक आरोपों में सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हाल ही में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी डभरा के उपाध्यक्ष बनाए गए अंगदेव यादव के खिलाफ चंद्रपुर थाना में महिला की शिकायत पर अपराध दर्ज किया गया है।
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता महिला ने आरोपी पर छेड़छाड़, जबरन दुष्कर्म और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, प्रकरण दर्ज होने के बाद भी आरोपी तक पुलिस की पहुंच नहीं बनने को लेकर स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं।

एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज
चंद्रपुर थाना में दर्ज शिकायत के अनुसार पीड़िता अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित बताई जा रही है। महिला द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म, छेड़छाड़, जान से मारने की धमकी और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्रकरण कायम किया है।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने महिला को खेत की ओर ले जाकर जबरन दुष्कर्म किया तथा घटना की जानकारी सार्वजनिक करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

जिम्मेदारी मिलने के कुछ समय बाद विवादों में नाम
गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में कांग्रेस संगठन द्वारा अंगदेव यादव को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी डभरा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। संगठन में सक्रियता को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा रही थी। लेकिन अब गंभीर आरोप सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में क्या रुख अपनाएगा।

गिरफ्तारी नहीं होने पर उठ रहे सवाल
क्षेत्र के लोगों के बीच चर्चा का विषय यह भी बना हुआ है कि गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो पाई है। कुछ लोग पुलिस कार्रवाई की गति पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत साक्ष्य एकत्र कर रही होगी।

वहीं स्थानीय नागरिक निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग कर रहे हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई जल्द सामने आ सके।

संगठन की चुप्पी पर भी चर्चा
मामले के सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस संगठन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आने को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि एफआईआर दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं होता। न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने तक आरोपी को कानूनन दोषी नहीं माना जाता। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

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