सरकारी शराब दुकान में कथित कीड़ा युक्त शराब का मामला, जनता बोली- ‘नशा कम था क्या, अब बीमारी भी परोसोगे?’

डोलकुमार निषाद@डभरा/सक्ती:
शक्ति जिले के डभरा ब्लॉक स्थित शासकीय देशी शराब दुकान से सामने आई कथित कीड़ा युक्त शराब की तस्वीरों ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया में वायरल तस्वीरों में शराब की बोतल के अंदर कथित रूप से कीड़ा दिखाई दे रहा है। तस्वीरें सामने आते ही क्षेत्र में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है और लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर सरकारी दुकान में बिक रही शराब की निगरानी कौन कर रहा है?

कीड़ा युक्त शासकीय शराब बोतल

कहते हैं शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है, लेकिन अब लोग तंज कसते नजर आ रहे हैं – “पहले शराब शरीर खराब करती थी, अब लगता है बोतल देखकर हिम्मत भी खराब होने लगी है।”
जनता पूछ रही है कि क्या अब शराब खरीदने से पहले ग्राहक को ढक्कन, सील और अंदर की सामग्री का निरीक्षण भी करना पड़ेगा?

शोशल मीडिया में तेजी से वायरल होता तस्वीर..

वैज्ञानिक नजरिए से मामला कितना गंभीर.?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि किसी सीलबंद बोतल में कीड़ा या बाहरी जीव दिखाई देता है, तो इसके पीछे पैकिंग के दौरान स्वच्छता में कमी, खराब स्टोरेज, सीलिंग में दोष या दूषण जैसी वजहें हो सकती हैं। हालांकि केवल तस्वीरों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसकी वास्तविक पुष्टि प्रयोगशाला जांच और विभागीय परीक्षण के बाद ही संभव है।

लेकिन यहां सवाल केवल एक कीड़े का नहीं, बल्कि सिस्टम की सतर्कता का भी है। क्योंकि जब सरकार स्वयं शराब बेच रही है, तब गुणवत्ता को लेकर जवाबदेही और भी बढ़ जाती है। आखिर उपभोक्ता पैसा किस बात का दे रहा है— नियंत्रित गुणवत्ता का या किस्मत के भरोसे मिलने वाले माल का?

कड़वा घूंट:
राजस्व के नाम पर शराब की बिक्री बढ़ रही है, लेकिन यदि बोतलों में इस तरह की शिकायतें सामने आने लगें, तो जनता का भरोसा भी दरकने लगता है। लोग तंज में कह रहे हैं—
सरकारी शराब दुकान है साहब, यहां नशे के साथ सरप्राइज पैक भी मिल रहा है!”

एक ओर इलाके में चर्चा में है:
“शराब खराब है, यह तो सरकार खुद बोतल पर लिखवाती है… लेकिन अगर शराब ही खराब निकल जाए, तो फिर शिकायत किससे करें?”

बड़ा सवाल:
यदि यह मामला जांच में सही पाया जाता है, तो क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर ‘जांच जारी है’ की चुस्की में खत्म हो जाएगा?“सरकार को शायद लगता होगा कि शराबी कुछ नहीं बोलेंगे, क्योंकि नशे में हैं… लेकिन साहब, जब बोतल में नशे के बजाय कीड़ा तैरने लगे, तब सवाल शराबी नहीं, पूरा समाज पूछता है। ऐसे ही चलता रहा तो एक दिन शराबी नहीं, शराब की बदनामी और सिस्टम की लापरवाही सरकार की साख को जरूर ले डूबेगी… क्योंकि शराब खराब है, पर शराबी माने तब ना!”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Have Missed
Back