बाराद्वार थाना क्षेत्र में गांजा तस्करी पर पर्दा डालने की कोशिश? कार पलटने के बाद भी 10 घंटे तक ‘सड़क हादसा’ बताती रही पुलिस
ग्रामीणों के सामने हुई कार्रवाई, बाद में प्रेस विज्ञप्ति में बदली कहानी; घटना की तारीख और जब्ती मात्रा पर उठे गंभीर सवाल
सक्ती/बाराद्वार। बाराद्वार थाना क्षेत्र
में गांजा तस्करी के एक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के अनुसार 6 मार्च की सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच एक संदिग्ध कार का पीछा चार पुलिसकर्मी कर रहे थे। पुलिस से बचने की कोशिश में कार अनियंत्रित होकर सक्ती कलेक्टर कार्यालय के पीछे नहर पार क्षेत्र में पलट गई। यह स्थान पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समीप बताया जा रहा है और पूरा मामला बाराद्वार थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि कार नहर में पलटने के बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने वाहन में सवार दो युवकों को हिरासत में लिया और कार से दो काले बैग तथा ब्राउन रंग के करीब पचास से अधिक पैकेट जब्त किए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम ग्रामीणों के सामने हुआ और मौके पर सिविल ड्रेस में पहुंचे बाराद्वार पुलिस के जवान कार्रवाई करते नजर आए।
घटना के तुरंत बाद पुलिस ने क्रेन मंगाकर करीब एक घंटे के भीतर ही पलटी हुई चारपहिया वाहन को उठाकर थाना पहुंचा दिया। इस बीच क्षेत्र में गांजा तस्करी की चर्चा तेजी से फैल गई। हालांकि शुरुआती घंटों में पुलिस द्वारा पूरे मामले को सड़क हादसा बताने की कोशिश की गई।
सूत्रों के अनुसार मामला दबता नहीं देख करीब 10 घंटे बाद पुलिस ने स्वीकार किया कि वाहन में मादक पदार्थ गांजा था, लेकिन उसकी मात्रा की जानकारी नहीं दी गई। उस समय शाम तक कार्रवाई कर प्रेस विज्ञप्ति जारी करने की बात कही गई, लेकिन 6 मार्च पूरा बीत जाने के बाद भी कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की गई।
इसके बाद 7 मार्च की देर शाम बाराद्वार पुलिस द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। प्रेस विज्ञप्ति में मुखबिर की सूचना पर रेड कार्रवाई का उल्लेख किया गया, जबकि कार के पलटने की घटना का कोई जिक्र नहीं किया गया। ग्रामीणों के अनुसार वाहन में बड़ी मात्रा में गांजा भरा हुआ था, जबकि प्रेस विज्ञप्ति में बताई गई मात्रा में करीब 90 प्रतिशत तक का अंतर बताया जा रहा है। सबसे हैरानी की बात यह भी सामने आई कि प्रेस विज्ञप्ति में घटना की तारीख और वास्तविक स्थान का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए तो तस्करों और कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत की परतें खुल सकती हैं।
अब आम लोगों की मांग है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
