
सुरज बीसी गरियाबंद
न चल पाता है, न हाथ की उंगलियां फिंगरप्रिंट के लिए ठीक से काम करतीं; सरकारी व्यवस्था के सामने बेबस परिवार
मैनपुर (गरियाबंद)। शासन द्वारा दिव्यांगजनों को पेंशन सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों पर सवाल खड़े करती है। ऐसा ही मामला जनपद पंचायत मैनपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत मुड़ागांव निवासी 30 वर्षीय दिव्यांग मदन नागेश का सामने आया है, जो पेंशन का लाभ पाने के लिए आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में अपनी मां के साथ दर-दर भटकने को मजबूर है
मदन नागेश, पिता पुस्तम नागेश एवं माता सुभद्रा नागेश का पुत्र है। बताया गया कि मदन चलने-फिरने में असमर्थ है। वहीं उसके हाथ की उंगलियां भी फिंगरप्रिंट देने में सक्षम नहीं हैं। ऐसी स्थिति में आधार कार्ड बनवाना उसके परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
परिवार के अनुसार आधार कार्ड के अभाव में मदन को पेंशन सहित शासन की अन्य योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो रही है। अपनी जरूरतों और सरकारी योजनाओं का लाभ पाने की उम्मीद में उसकी मां उसे लेकर अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं। लेकिन दिव्यांग व्यक्ति के लिए ऐसी प्रक्रिया पूरी करना स्वयं में बड़ी कठिनाई है
फिंगरप्रिंट नहीं आने पर क्या है वैकल्पिक व्यवस्था?
आधार पंजीयन में बायोमेट्रिक संबंधी समस्या होने वाले दिव्यांगजनों के लिए संबंधित विभाग द्वारा उपलब्ध वैकल्पिक प्रक्रिया के माध्यम से सहायता किए जाने की जरूरत है। ऐसे में सवाल उठता है कि मदन नागेश की स्थिति को देखते हुए जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक क्या पहल की है।
मदद की उम्मीद में परिवारमदन की मां का कहना है कि उनका बेटा चलने-फिरने में सक्षम नहीं है और हाथ की उंगलियों से फिंगरप्रिंट भी नहीं दे पाता। ऐसे में वह बेटे को लेकर लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। परिवार चाहता है कि जिम्मेदार अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए आधार संबंधी समस्या का समाधान कराएं, ताकि मदन को पेंशन सहित पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए दिव्यांग मदन नागेश और उसके परिवार की समस्या का समाधान कब तक करता है।
