पावर ग्रिड के लिए 165 एकड़ भूमि प्रस्तावित होने से ग्रामीणों में आक्रोश, पहले बांध और नहर में गंवा चुके हैं सैकड़ों एकड़ जमीन

मालखरौदा (सक्ती)। सक्ती जिले के ग्राम पंचायत सपिया में प्रस्तावित पावर ग्रिड परियोजना को लेकर किसानों का विरोध तेज होता जा रहा है। अपनी बची हुई उपजाऊ कृषि भूमि को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे किसानों की आवाज अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी गूंजने लगी है। चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक रामकुमार यादव किसानों के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने ग्राम सपिया पहुंचकर प्रभावित किसानों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और शासन-प्रशासन से किसानों की जमीन बचाने की मांग उठाई।

ग्रामीणों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर वे पहले ही अपनी सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि गंवा चुके हैं। अब पावर ग्रिड स्थापना के लिए शेष जमीन भी प्रस्तावित किए जाने से उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

किसानों की पीड़ा सुनने पहुंचे विधायक रामकुमार यादव

ग्राम पंचायत सपिया पहुंचे विधायक रामकुमार यादव ने किसानों से चर्चा करते हुए उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि गांव की लगभग 100 एकड़ कृषि भूमि कर्रापाली जलाशय बांध और 150 एकड़ से अधिक भूमि जल संसाधन विभाग की नहर निर्माण परियोजना के लिए पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है।

अब सपिया, फगुरम और अंजोरीपाली की कुल लगभग 165 एकड़ भूमि पावर ग्रिड स्थापना के लिए प्रस्तावित बताई जा रही है। इससे किसानों में भारी नाराजगी है।

विधायक यादव ने किसानों की चिंताओं को जायज बताते हुए कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन किसानों की आजीविका और उनके भविष्य की अनदेखी कर किसी परियोजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से प्रभावित किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से सुनने और उनके हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।

पहले जमीन गई, फिर भी नहीं मिला सिंचाई का अपेक्षित लाभ

विधायक रामकुमार यादव ने ग्रामीणों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बांध और नहर निर्माण के लिए किसानों ने पहले ही अपनी बहुमूल्य कृषि भूमि गंवाई है। किसानों की शिकायत है कि जमीन देने के बावजूद उन्हें नहर से अपेक्षित सिंचाई सुविधा का लाभ नहीं मिल सका।

अब उनकी जो जमीन बची हुई है, वह उपजाऊ है और उसमें दो फसलें ली जाती हैं। यदि यह भूमि भी अधिग्रहित हो गई तो अनेक किसान परिवारों के सामने खेती और भरण-पोषण का संकट उत्पन्न हो जाएगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक ही क्षेत्र के किसानों को बार-बार अपनी जमीन क्यों गंवानी पड़े? क्या परियोजना के लिए कोई ऐसा वैकल्पिक स्थान नहीं तलाशा जा सकता, जिससे किसानों की उपजाऊ भूमि सुरक्षित रह सके?

बिना नोटिस जमीन की नाप-जोख का आरोप, विधायक ने उठाए सवाल

प्रभावित किसानों ने आरोप लगाया कि पावर ग्रिड परियोजना के लिए उनकी जमीन का सर्वे और नाप-जोख कराया जा रहा है, लेकिन उन्हें इसकी विधिवत सूचना नहीं दी गई है। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ लोगों को साथ लेकर गुपचुप तरीके से सर्वे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

इस मामले पर विधायक रामकुमार यादव ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसानों की जानकारी और उनकी आपत्तियों को सुने बिना जमीन संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की शिकायत गंभीर विषय है।

उन्होंने कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार से मामले में हस्तक्षेप करने तथा प्रभावित किसानों की समस्याओं का उचित समाधान निकालने की मांग की।

किसानों की हुंकार—मर जाएंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे

अपनी कृषि भूमि को बचाने के लिए सपिया के किसान अब आर-पार के संघर्ष का मन बना रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन ही उनके परिवार की आजीविका का सबसे बड़ा सहारा है। पहले ही काफी कृषि भूमि अधिग्रहित हो चुकी है और अब बची हुई जमीन भी चली गई तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा।

किसानों की इसी पीड़ा को सामने रखते हुए विधायक रामकुमार यादव ने शासन-प्रशासन से संवेदनशीलता दिखाने की अपील की।

उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर किसानों के सम्मान और कल्याण की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर गरीब किसानों की जमीन को लेकर उनकी चिंताओं की अनदेखी की जा रही है।

राज्यपाल से मुख्यमंत्री तक लगा चुके गुहार, अब आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों के अनुसार, प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में वे राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांसद और क्षेत्रीय विधायक को ज्ञापन सौंप चुके हैं। इसके अतिरिक्त किसानों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित नहीं करने की मांग भी रखी है।

इसके बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आने से ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं किया गया तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

किसानों की आवाज बने रामकुमार यादव, अब प्रशासन के फैसले पर नजर

सपिया में प्रस्तावित पावर ग्रिड परियोजना को लेकर उठे विवाद के बीच विधायक रामकुमार यादव के किसानों के समर्थन में सामने आने से यह मुद्दा और प्रमुखता से उभर आया है। उन्होंने किसानों के हितों की रक्षा की मांग करते हुए प्रशासन से ऐसा समाधान निकालने को कहा है, जिससे विकास कार्यों के साथ किसानों की आजीविका भी सुरक्षित रह सके।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन प्रभावित किसानों की आपत्तियों पर क्या निर्णय लेता है और क्या पावर ग्रिड परियोजना के लिए वैकल्पिक भूमि तलाशने की दिशा में कोई पहल होती है।

फिलहाल सपिया सहित आसपास के गांवों के किसानों के लिए यह लड़ाई केवल 165 एकड़ जमीन की नहीं, बल्कि अपनी खेती, परिवार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने की बन चुकी है।

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