कहां गया विकास? बीमार बुजुर्ग के लिए कंधे बने एंबुलेंस, वीडियो वायरलएक बुजुर्ग की जिंदगी और दो कंधों का सहारा, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

बलरामपुर/कुसमी सरकार गांव-गांव तक सड़क, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की तस्वीर बदलने और अंतिम छोर तक सुविधाएं पहुंचाने की बात कही जाती है। लेकिन बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड से सामने आया एक वीडियो इन तमाम दावों पर सवाल खड़े कर रहा है।कुसमी विकासखंड के ग्राम पंचायत अमरपुर के भाईसा पाठ गांव का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक बीमार बुजुर्ग को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के लिए दो व्यक्ति अपने कंधों पर उठाकर पैदल ले जाते हुए नजर आ रहे हैं। यह दृश्य न सिर्फ बेहद दर्दनाक है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और आवागमन की सुविधाओं की जमीनी हकीकत को भी बयां करता नजर आ रहा है।वीडियो में दिखाई दे रहा है कि बीमारी से परेशान बुजुर्ग को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को किसी वाहन का सहारा नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी ऐसी कि जिंदगी बचाने की उम्मीद में लोग बुजुर्ग को कंधे पर उठाकर रास्ता तय करने को मजबूर हैं।सोचिए… जिस उम्र में एक बुजुर्ग को सहारे की जरूरत होती है, उस उम्र में उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए दो लोगों के कंधों का सहारा लेना पड़े तो उस परिवार पर क्या गुजरती होगी।एक तरफ शासन-प्रशासन गांवों के विकास, सड़क निर्माण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करता है, वहीं दूसरी ओर आज भी कई ग्रामीण ऐसे हैं जिन्हें बीमारी की हालत में अस्पताल तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव तक बेहतर सड़क और परिवहन की सुविधा होती, तो शायद बीमार बुजुर्ग को इस तरह कंधे पर लेकर जाने की नौबत नहीं आती। बारिश के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और भी मुश्किल हो जाती है। रास्ते खराब होने के कारण कई जगहों पर चारपहिया वाहन या एंबुलेंस पहुंचना भी चुनौती बन जाता है।यह वीडियो सिर्फ एक बुजुर्ग को कंधे पर लेकर जाने का दृश्य नहीं है। यह उन तमाम सवालों को सामने लाता है, जिनका जवाब ग्रामीण आज भी शासन और प्रशासन से मांग रहे हैं।आखिर विकास की वह तस्वीर कहां है, जिसकी बातें सरकारी योजनाओं और बैठकों में होती हैं?आखिर गरीब और दूरदराज के ग्रामीण परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं कितनी आसानी से उपलब्ध हैं?अगर किसी ग्रामीण की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, तो क्या उसे समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था है?

और सबसे बड़ा सवाल———-//////क्या आज भी किसी गरीब बुजुर्ग को इलाज के लिए कंधे पर उठाकर अस्पताल ले जाना ही उसकी मजबूरी है?सरकार की योजनाओं का उद्देश्य निश्चित तौर पर ग्रामीण और गरीब परिवारों तक सुविधाएं पहुंचाना है, लेकिन अमरपुर के भाईसा पाठ गांव से सामने आया यह वीडियो व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।ग्रामीणों ने इस वीडियो को बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है, ताकि उनकी समस्या शासन-प्रशासन तक पहुंचे और जिम्मेदार अधिकारी गांव की वास्तविक स्थिति का जायजा लें।ग्रामीणों की मांग है कि गांव तक पहुंचने वाले रास्ते की स्थिति सुधारी जाए और जरूरत पड़ने पर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए सुलभ स्वास्थ्य एवं परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी बीमार व्यक्ति को इस तरह कंधे पर उठाकर अस्पताल ले जाने की मजबूरी न हो।क्योंकि सवाल सिर्फ एक बुजुर्ग की बीमारी का नहीं है…सवाल उस व्यवस्था का है, जहां इलाज के लिए अस्पताल तो मौजूद है, लेकिन अस्पताल तक पहुंचने का रास्ता आज भी गरीबों के लिए मुश्किल बना हुआ है।यह तस्वीर विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को सामने लाती है।अब देखना होगा कि वायरल वीडियो के बाद शासन-प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और भाईसा पाठ गांव के ग्रामीणों की समस्या का समाधान कब तक होता है।कंधे पर उठता बुजुर्ग सिर्फ एक मरीज नहीं, बल्कि व्यवस्था से मदद की गुहार लगाती एक तस्वीर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back