सेरंगदाग में बालाजी मार्बल एंड टाइल्स प्राइवेट लिमिटेड पर गंभीर आरोप, रोजी-रोटी छिनने से मजदूरों में आक्रोश; सरपंच ने कहा- मजदूरों के साथ हूं, न्याय दिलाने हर स्तर पर लड़ूंगा

बलरामपुर। जिले के सामरी तहसील अंतर्गत ग्राम सेरंगदाग में संचालित बालाजी मार्बल एंड टाइल्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पर स्थानीय मजदूरों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मजदूरों का कहना है कि कंपनी में वर्षों से काम कर रहे करीब 45 स्थानीय मजदूरों को अचानक काम से बाहर कर दिया गया, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
मजदूरों का आरोप है कि जिस क्षेत्र में कंपनी को जमीन उपलब्ध कराने में स्थानीय लोगों की भूमिका रही, वहीं अब उन्हीं स्थानीय मजदूरों को रोजगार से बाहर किया जा रहा है। मजदूरों के अनुसार कंपनी प्रबंधन की ओर से कथित तौर पर यह बात कही जाती है कि जमीन दोगे, तभी काम मिलेगा। इस कथित रवैये को लेकर मजदूरों में भारी नाराजगी है।
वर्षों से काम, फिर भी सुरक्षा उपकरणों का अभाव
मजदूरों ने कंपनी प्रबंधन पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लंबे समय से कंपनी में काम करने के बावजूद उन्हें पर्याप्त सेफ्टी शूज, स्टील हेलमेट, ड्रेस और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते।
मजदूरों के मुताबिक कई बार निर्धारित समय से अधिक काम कराया जाता है, लेकिन उसके अनुरूप मजदूरी नहीं मिलती। ऐसे में एक तरफ काम का दबाव और दूसरी तरफ सुरक्षा साधनों की कमी ने मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
मजदूरों का सवाल है कि यदि कंपनी में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की है, तो फिर उन्हें बुनियादी सुरक्षा उपकरणों से वंचित क्यों रखा जा रहा है?

शासकीय भूमि पर डंपिंग का भी आरोप, पर्यावरण पर उठे सवाल

मजदूरों और स्थानीय लोगों ने कंपनी पर शासकीय भूमि पर डंपिंग किए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कंपनी से निकलने वाले मटेरियल की डंपिंग के कारण आसपास का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल मजदूरों के अधिकारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भूमि उपयोग, पर्यावरणीय नियमों और संबंधित विभागों की अनुमति को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभागों को मौके पर पहुंचकर डंपिंग स्थल की जांच करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि कंपनी द्वारा जिस भूमि का उपयोग किया जा रहा है, वह किसकी भूमि है और वहां डंपिंग की अनुमति किस आधार पर दी गई है।
45 मजदूरों की नौकरी वापस लेने की मांग
काम से निकाले गए मजदूरों ने कंपनी प्रबंधन से उन्हें दोबारा काम पर रखने की मांग की है। मजदूरों का कहना है कि उनके पास रोजगार का दूसरा कोई बड़ा साधन नहीं है। वर्षों से कंपनी में काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले मजदूरों के सामने अचानक बेरोजगारी की स्थिति पैदा हो गई है।
मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें वापस काम पर नहीं रखा गया और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे कंपनी के खिलाफ आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। मजदूरों ने जरूरत पड़ने पर कंपनी बंद कराने तक आंदोलन करने का अल्टीमेटम दिया है।

सरपंच बोले- मजदूरों के साथ हूं, न्याय दिलाने हर संभव प्रयास करूंगा

मामले को लेकर ग्राम पंचायत सेरेनगदाग के सरपंच अजीत नगेसिया ने कहा कि उन्हें पहले इस पूरे मामले की जानकारी नहीं थी, लेकिन अब जब मजदूरों की समस्या उनके सामने आई है तो वे उनके साथ खड़े हैं।
सरपंच ने कहा कि यदि कंपनी द्वारा गांव के स्थानीय मजदूरों के साथ अन्याय किया जा रहा है तो वे मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। जरूरत पड़ने पर जहां जाना पड़ेगा और जो प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी, उसे अपनाया जाएगा।
सरपंच के इस बयान के बाद मामले ने स्थानीय स्तर पर और तूल पकड़ लिया है।

कंपनी के GM ने आरोपों को बताया गलत

वहीं इस पूरे मामले में बालाजी मार्बल एंड टाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के GM आलोक चतुर्वेदी ने मजदूरों द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि मजदूरों की ओर से कंपनी पर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं।
GM के अनुसार कंपनी द्वारा माइनिंग से जुड़े नियमों का पालन करते हुए कार्य किया जा रहा है। उन्होंने मजदूरों द्वारा लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

एक तरफ स्थानीय मजदूर कंपनी प्रबंधन पर रोजगार छीनने, सुरक्षा उपकरण नहीं देने, अधिक समय तक काम कराने और कम मजदूरी देने जैसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कंपनी प्रबंधन इन आरोपों को गलत बता रहा है।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सच्चाई क्या है?
क्या वास्तव में 45 स्थानीय मजदूरों को बिना उचित कारण काम से हटाया गया है?
क्या मजदूरों को नियमानुसार सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे थे?
क्या निर्धारित मजदूरी और काम के घंटे के नियमों का पालन हो रहा है?
क्या शासकीय भूमि पर कंपनी द्वारा डंपिंग की गई है?
और यदि डंपिंग की गई है तो इसके लिए संबंधित विभाग से अनुमति ली गई थी या नहीं?
इन तमाम सवालों का जवाब अब श्रम विभाग, खनिज विभाग, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
फिलहाल मजदूर अपने हक और रोजगार की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। वहीं कंपनी अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर रही है। ऐसे में देखना होगा कि खबर सामने आने के बाद प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या मजदूरों की शिकायतों की जांच कर कोई ठोस कार्रवाई की जाती है।
मजदूरों का कहना है कि उन्हें दया नहीं, उनका हक चाहिए—रोजगार चाहिए, सम्मान चाहिए और काम के दौरान सुरक्षा चाहिए।

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