“पानी मांगने पहुंचे ग्रामीण, नेताओं ने बहा दी राजनीति की धारा”
✍️ डोलकुमार निषाद @ सक्ती/डभरा
प्रदेश सरकार जनता की समस्याएं सुनने सुशासन तिहार चला रही है, लेकिन डभरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत धुरकोट में लगा शिविर देखकर ऐसा लगा मानो शासन नहीं, “राजनीतिक कुश्ती प्रतियोगिता” का आयोजन हो रहा हो। जनता पानी की समस्या लेकर पहुंची थी, लेकिन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ऐसा माहौल बनाया कि समस्या पीछे छूट गई और राजनीति आगे निकल गई।

पूरा मामला ग्राम पंचायत खरकेना की पानी समस्या से शुरू हुआ। गांव की पूर्व सरपंच अपने पति के साथ शिकायत लेकर पहुंचीं। अफसर शायद सोच रहे होंगे कि अब समस्या सुनेंगे और समाधान करेंगे, लेकिन तभी राजनीति ने एंट्री मारी और देखते ही देखते मंच “भाजपा बनाम कांग्रेस” के लाइव शो में बदल गया।

एनएसयूआई के पूर्व जिलाध्यक्ष खुशवंत सिंह चंद्रा समर्थन में उतरे तो माहौल ऐसा गर्म हुआ कि पानी की समस्या भी शायद सोचने लगी होगी—“मेरा नंबर कब आएगा?” इधर जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे गूंजने लगे और उधर जनता अपनी शिकायतों की फाइल लेकर तमाशबीन बन गई।
करीब एक घंटे तक चले इस राजनीतिक महामुकाबले में सबसे मुश्किल भूमिका शायद अधिकारियों की रही। वायरल वीडियो में SDM डभरा विनय कश्यप जी लोगों को समझाते नजर आए, मानो किसी पंचायत शिविर में नहीं बल्कि दो प्रतिद्वंद्वी टीमों के बीच मैच रुकवाने आए हों।

अब सवाल यह है कि सुशासन तिहार में समाधान ज्यादा मिलेगा या राजनीतिक प्रदर्शन? क्योंकि जिस मंच पर पानी, सड़क और बिजली की बात होनी थी, वहां नेताओं ने “वर्चस्व की प्यास” बुझाने का प्रयास ज्यादा किया।
“जनता बोली — साहब पानी दिला दो… नेता बोले — पहले हमारी राजनीति देख लो!”
