दीपक दुबे ने कहा—“लाभ के लिए श्रमिकों की जान से खेला गया, 7 दिन में कार्रवाई नहीं तो उग्र आंदोलन”
डोलकुमार निषाद@जांजगीर/सक्ती/डभरा
सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल 2026 को हुए भीषण बॉयलर विस्फोट को लेकर सियासत और जनाक्रोश तेज हो गया है। भारतीय जनाधिकार पार्टी के संयोजक एवं अध्यक्ष दीपक दुबे ने इस हादसे को सीधे तौर पर “कॉर्पोरेट क्रिमिनल नेग्लिजेंस” करार देते हुए वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित जिम्मेदार अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

दीपक दुबे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट लालच, लापरवाही और प्रशासनिक विफलता का खतरनाक परिणाम है। उन्होंने कहा कि बिना समुचित तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मूल्यांकन के बंद पड़े प्लांट को जल्दबाजी में चालू करना सीधे-सीधे श्रमिकों की जान से खिलवाड़ है।
“बिना चेतावनी के मौत का विस्फोट”
दुबे ने बताया कि हादसे में कई श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। उच्च दबाव और तकनीकी खराबी के चलते हुए इस विस्फोट में अत्यधिक तापमान की भाप ने श्रमिकों को झुलसा दिया।
सबसे गंभीर बात यह रही कि घटना के समय न तो कोई प्रभावी चेतावनी प्रणाली थी और न ही सुरक्षित निकासी की व्यवस्था, जो सीधे तौर पर सुरक्षा तंत्र की पोल खोलता है।
“9 साल बंद प्लांट को बिना जांच फिर चालू किया”
दुबे ने खुलासा किया कि संबंधित परियोजना 9 वर्षों तक बंद रही और अधूरी स्थिति में थी। वर्ष 2016 तक यह केवल लगभग 60% ही पूरी हो पाई थी और बाद में वित्तीय संकट के कारण बंद हो गई।
आरोप है कि वेदांता ने इसे अधिग्रहण के बाद बिना पूर्ण ओवरहॉल, सेफ्टी ऑडिट और संरचनात्मक परीक्षण के ही संचालन शुरू कर दिया, जो गंभीर लापरवाही है।
पर्यावरणीय और तकनीकी खामियों का आरोप..
प्रेस विज्ञप्ति में EAC और Parivesh दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा गया कि परियोजना पुराने डिजाइन और पुराने सुरक्षा मानकों पर आधारित थी।
PM2.5 डेटा में त्रुटियां पाई गईं
पर्यावरणीय स्वीकृतियां बार-बार बढ़ाई गईं
“पब्लिक हियरिंग” से छूट देकर स्थानीय जोखिमों को नजरअंदाज किया गया..
दुबे ने इसे तकनीकी, पर्यावरणीय और नियामक स्तर पर गंभीर मिलीभगत का संकेत बताया।
बड़ी मांगें: FIR से लेकर प्लांट सीलिंग तक…
दीपक दुबे ने सरकार और प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग की है:..
चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित जिम्मेदारों पर नामजद FIR और गिरफ्तारी
स्वतंत्र SIT से समयबद्ध जांच
सभी तकनीकी रिकॉर्ड, CCTV और डेटा जब्त किए जाएं
जांच पूरी होने तक प्लांट को तत्काल सील किया जाए
मुआवजे पर भी विवाद..
दुबे ने मुआवजे को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा:
मृतकों के परिजनों को कम से कम ₹50 लाख और एक सदस्य को नौकरी दी जाए
गंभीर घायलों को ₹15 लाख और मुफ्त इलाज मिले
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि रायपुर के सिलतरा में हुए गोदावरी पावर हादसे में 47-47 लाख तक मुआवजा दिया गया था, जबकि यहां कम राशि की बात की जा रही है, जो अन्यायपूर्ण है।

7 दिन का अल्टीमेटम, वरना बड़ा आंदोलन..
दीपक दुबे ने साफ चेतावनी दी कि यदि 7 दिनों के भीतर FIR, गिरफ्तारी और उचित मुआवजा नहीं दिया गया तो मामला हाईकोर्ट तक ले जाया जाएगा।
साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय हरित अधिकरण में शिकायत और अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने की घोषणा भी की गई है।
सक्ती का यह औद्योगिक हादसा अब सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट जिम्मेदारी, सरकारी निगरानी और श्रमिक सुरक्षा पर बड़ा सवाल बन चुका है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने के आसार हैं।
