विदेशी जेलों में बंद मछुआरों की रिहाई पर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति, कुंवर सिंह निषाद बने राष्ट्रीय मछुआरा संघ के आजीवन सदस्य
डोलकुमार निषाद की स्पेशल रिपोर्ट छत्तीसगढ़ / केरला
केरल के अमृता विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय आदिवासी कश्यप-कहार-निषाद-भोई समन्वय समिति की महत्वपूर्ण बैठक में देशभर के मछुआरा समाज की एकजुटता का बड़ा संदेश सामने आया। 24 राज्यों से आए 84 प्रतिनिधियों की मौजूदगी में समाज के हक और अधिकारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्णायक लड़ाई लड़ने का ऐलान किया गया।

बैठक में केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने साफ कहा कि अब समय आ गया है जब कश्यप, निषाद और मछुआरा समाज की सभी उपजातियों को एक मंच पर लाकर उनकी समस्याओं का समाधान राष्ट्रीय स्तर पर किया जाए। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि गलती से अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर जेलों में बंद भारतीय मछुआरों की रिहाई के लिए भारत सरकार के जरिए दबाव बनाया जाएगा।

इस अहम बैठक में छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता और गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद को राष्ट्रीय मछुआरा संघ का आजीवन सदस्य बनाए जाने की घोषणा भी हुई, जिसे समाज के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
बैठक में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखे। संचालन बाबा मारतेंडे और गुरुचरण कश्यप ने किया।

कोमल निषाद का बयान (EXCLUSIVE)
समन्वय समिति के सक्रिय सदस्य कोमल निषाद ने कहा
“यह सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि मछुआरा समाज के भविष्य की दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक कदम है। अब हम बिखरे नहीं, संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। समाज के अधिकारों और सम्मान के लिए हर स्तर पर संघर्ष तेज किया जाएगा।”
राजनीतिक और सामाजिक संदेश:
1- मछुआरा समाज की एकता पर जोर
2- राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की तैयारी
3- विदेशों में बंद मछुआरों की रिहाई बड़ा मुद्दा
4- छत्तीसगढ़ की मजबूत भागीदारी
केरल की इस बैठक ने साफ कर दिया है कि अब मछुआरा समाज सिर्फ मांग नहीं करेगा, बल्कि संगठित ताकत बनकर अपने अधिकार लेकर रहेगा। आने वाले समय में यह आंदोलन देश की राजनीति और सामाजिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।
