जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमल पटेल ने कहा—अगर डभरा में अस्पताल होता तो बच सकती थीं कई जानें

डोलकुमार निषाद@डभरा:
वेदांता पावर प्लांट हादसे को लेकर अब सवालों का दायरा और गहराता जा रहा है। जिला पंचायत सक्ती के उपाध्यक्ष कमल पटेल ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि हादसे में हुई मौतों का मुख्य कारण समय पर इलाज न मिल पाना है।

उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाया कि घायलों को इलाज के लिए रायगढ़ ले जाते समय देरी हो गई, जिससे कई लोगों की हालत रास्ते में ही बिगड़ती चली गई और आखिरकार उनकी जान नहीं बच सकी।

“अस्पताल होता तो बच जाती जान”
कमल पटेल ने कहा कि यदि डभरा तहसील में क्षेत्र की तीनों बड़ी फैक्ट्रियों के सहयोग से एक आधुनिक अस्पताल स्थापित किया गया होता, तो घायलों को तत्काल उपचार मिल सकता था और कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

CSR फंड पर उठे सवाल.?
उन्होंने उद्योगपतियों पर निशाना साधते हुए कहा-
“अरबों-खरबों की कमाई करने वाले उद्योग अगर अपने CSR फंड का सही उपयोग करें, तो क्षेत्र में एक अत्याधुनिक अस्पताल आसानी से खोला जा सकता है,,।”

पटेल ने सुझाव दिया कि तीनों फैक्ट्रियां मिलकर थोड़ी-थोड़ी राशि लगाएं, तो डभरा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

जनभावना में उबाल.
हादसे के बाद क्षेत्र में आक्रोश और दुख का माहौल है। स्थानीय लोग भी अब यही सवाल उठा रहे हैं कि जब उद्योगों से भारी मुनाफा हो रहा है, तो बुनियादी सुविधाओं—खासकर स्वास्थ्य—पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा।

सवाल अब भी कायम.
क्या समय पर इलाज मिलता तो मौतें टल सकती थीं?

क्या CSR फंड का सही उपयोग हो रहा है?

क्या उद्योग अब इस दिशा में ठोस कदम उठाएंगे.?

वेदांता हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी खामियों को उजागर करता है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार लोग सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहते हैं या जमीन पर बदलाव भी नजर आता है।

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