ग्राम मलदी में स्टॉप डेम निर्माण में भारी भ्रष्टाचार: न सूचना बोर्ड, न निगरानी—लाखों की लागत का कार्य सवालों के घेरे में

सक्ती/अवधेश टंडन। ग्राम मलदी में लाखों रुपये की लागत से बन रहे स्टॉप डेम निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार उजागर हो रहे हैं। परियोजना स्थल पर जहां एक ओर निर्माण कार्य चल रहा है, वहीं सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है, जिससे आमजन को यह तक जानकारी नहीं है कि यह कार्य कब प्रारंभ हुआ, किस एजेंसी द्वारा किया जा रहा है और इसकी लागत कितनी है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य ठेकेदार द्वारा पेटी ठेकेदारों के माध्यम से कराया जा रहा है। कार्य की गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। मटेरियल की गुणवत्ता संदेहास्पद है—सीमेंट की मात्रा कम, रेत-मुरम की जगह स्थानीय मिट्टी और अपशिष्ट सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। साजिशन बिना इंजीनियरिंग पर्यवेक्षण के यह कार्य कराया जा रहा है ताकि निर्माण की खामियों को दबाया जा सके।

मौके पर कोई भी विभागीय अधिकारी नज़र नहीं आता। निर्माण कार्य पूरी तरह मजदूरों और पेटी ठेकेदारों के हवाले छोड़ दिया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा भ्रष्टाचार संभव नहीं है।

एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि यहां कोई भी विभागीय अधिकारी नहीं पहुंचते मजदूरों और मुंशी ही पूरा निर्माण कार्य को अंजाम दे रहे हैं। जिस स्तर का निर्माण कार्य हो रहा है। उससे नहीं लगता कि यह स्टॉप डेम ज्यादा दिन टिक पाएगा।

सूत्रों की मानें तो निर्माण में प्रयुक्त सामग्रियों की दरों में भारी गड़बड़ी कर फर्जी बिल लगाकर लाखों रुपये का गबन करने की तैयारी है। न तो लेवलिंग का काम तय मानकों के अनुसार हो रहा है, न ही सीमेंट कंक्रीट का अनुपात सही रखा जा रहा है। यदि यही स्थिति रही तो यह डेम वर्षा के पहले ही भरभराकर ढह सकता है।

इस पूरे मामले में जल संसाधन विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। क्या विभागीय उच्चाधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं, या फिर कहीं ऊपर तक सांठगांठ है?

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