धमाके ने छीनी मजदूरों की सांस, सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल”
डोलकुमार निषाद@डभरा/छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता लिमिटेड के पावर प्लांट में मंगलवार दोपहर हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने एक बार फिर उद्योगों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। डभरा थाना क्षेत्र के सिंघीतराई स्थित इस प्लांट में हुए धमाके ने काम कर रहे मजदूरों को सीधे मौत के मुंह में धकेल दिया।

दोपहर करीब 2 बजे अचानक हुए तेज धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, धमाका इतना भयंकर था कि आसपास काम कर रहे मजदूर संभल भी नहीं पाए और आग व भाप की चपेट में आ गए। देखते ही देखते घटनास्थल चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गया।

30 से ज्यादा मजदूर झुलसे, मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका
सूत्रों के अनुसार, इस हादसे में 30 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं। मौके पर ही 7 से 8 मजदूरों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि रायगढ़ जिले के खरसिया में इलाज के दौरान एक मजदूर की मौत की पुष्टि हो चुकी है। कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल और प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंचीं,
लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्लांट में पहले से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे? स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया जाता, तो इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी।
तकनीकी खामी या सिस्टम की लापरवाही?
प्रारंभिक जांच में बॉयलर में अत्यधिक दबाव या तकनीकी खराबी को हादसे की वजह माना जा रहा है, लेकिन असली कारण जांच के बाद ही सामने आएगा। प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और प्लांट प्रबंधन से जवाब तलब किया गया है।
मजदूरों की जान सस्ती क्यों?
इस हादसे ने एक बार फिर यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को इतनी हल्के में क्यों लिया जाता है? हर बड़े हादसे के बाद जांच और आश्वासन मिलते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदलती।
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है…
फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
