महंगे पंडाल, दिखावा और भीड़ से दूरी—अब मंदिर में सादगी से हो रही शादियां, समाज को दिया बड़ा संदेश

जैजैपुर/सक्ती से विशेष संवाददाता डोलकुमार निषाद की खास रिपोर्ट

शादी-विवाह में बढ़ती फिजूलखर्ची और दिखावे की होड़ के बीच केंवट निषाद समाज ने एक प्रेरणादायक और अनुकरणीय पहल करते हुए सादगी की नई मिसाल पेश की है। समाज ने बड़े-बड़े आयोजनों और लाखों के खर्च से किनारा कर मंदिर में सरल और संस्कारपूर्ण तरीके से विवाह कराने का निर्णय लिया है।

इसी कड़ी में सक्ती जिले के जैजैपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कचन्दा स्थित केंवट समाज मंदिर में एक सादगीपूर्ण विवाह संपन्न कराया गया। इस विवाह में दूल्हा पक्ष डभरा ब्लॉक के ग्राम सकराली तथा दुल्हन पक्ष जैजैपुर ब्लॉक के ग्राम सल्ली से संबंधित रहा। बिना आडंबर, बिना भीड़-भाड़ और बिना अनावश्यक खर्च के यह विवाह पूरे विधि-विधान से संपन्न हुआ।

इस आयोजन में केंवट निषाद समाज के डभरा ब्लॉक अध्यक्ष शंकर केंवट, कोषाध्यक्ष चन्द्रकुमार निषाद सहित समाज के पंचगण एवं प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे।

समाज के उत्थान के लिए लगातार प्रयास जारी” — शंकर केंवट
डभरा ब्लॉक अध्यक्ष शंकर केंवट ने इस पहल को समाज के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में समाज के उत्थान के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 4 वर्षों के कार्यकाल में समाज द्वारा अनेकों सादगीपूर्ण विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजन से न केवल समाज के लोगों पर आर्थिक बोझ कम होता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी सादगी और संस्कार का सही संदेश मिलता है।

सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम:
केंवट निषाद समाज की इस पहल ने यह साबित कर दिया कि विवाह जैसे पवित्र संस्कार के लिए दिखावा और अत्यधिक खर्च जरूरी नहीं है। इस कदम से न केवल समाज के लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि अन्य समाजों के लिए भी यह एक मजबूत संदेश बनकर उभरा है।

फिजूलखर्ची पर रोक:
महंगे पंडाल, डेकोरेशन, बैंड-बाजा और भीड़भाड़ से दूर रहकर सादगीपूर्ण विवाह किया गया।

आर्थिक बचत का संदेश:
शादी में बचाई गई राशि का उपयोग नवदंपति अपने भविष्य को संवारने—जैसे जमीन खरीदने, घर बसाने या सोना लेने में कर सकते हैं।

संस्कार बनाम दिखावा:
समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि विवाह एक पवित्र बंधन है, न कि दिखावे का मंच।

समाज के लिए मिसाल:
इस पहल ने यह सोच बदलने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया है कि “शादी जितनी महंगी, उतनी प्रतिष्ठा।” अब सादगी ही सम्मान और समझदारी की पहचान बनती जा रही है। केंवट निषाद समाज की यह मुहिम आने वाले समय में एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकती है।

संदेश:
जहां एक ओर लोग कर्ज लेकर शादियों में दिखावा करते हैं, वहीं केंवट निषाद समाज ने सादगी अपनाकर समाज को नई दिशा देने का काम किया है। यह पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक जागरूकता का संदेश भी है।

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