
*रायपुर।* सवाल हर्ष फायरिंग का है, तो कार्रवाई सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित क्यों? यही सवाल अब छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बन गया है।
क्या आईपीएस अंकिता शर्मा लोकप्रिय हैं, इसलिए निशाने पर हैं? क्या एक महिला अधिकारी होने के कारण उनके मामले को ज्यादा तूल दिया जा रहा है? या फिर साड़ी पहनकर शस्त्र पूजा के दौरान बंदूक चलाना ही उनके खिलाफ सवाल खड़े करने की वजह बन गया है?
सवाल कई हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है — अगर हर्ष फायरिंग नियमों के खिलाफ है, तो कार्रवाई का पैमाना सबके लिए एक जैसा क्यों नहीं होना चाहिए?
दशहरे के अवसर पर शस्त्र पूजा पुलिस विभाग की वर्षों पुरानी परंपरा रही है। इस दौरान कई जिलों में पुलिस अधिकारी पूजा-अर्चना करते दिखाई देते हैं और कुछ मौकों पर अधिकारियों के हर्ष फायरिंग करने के वीडियो भी सामने आते रहे हैं।

*कवर्धा की ही तस्वीर देख लीजिए,* जहां डीएसपी आशीष शुक्ला फायर करते दिख रहे हैं। इसी तरह रायगढ़ के एसपी शशिमोहन सिंह हों या दूसरे जिलों के कई पुलिस अधिकारी — यदि इनके वीडियो में भी इसी तरह की हर्ष फायरिंग दिखाई देती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इन मामलों में भी समान मानकों के तहत जांच और कार्रवाई की गई?
यहां सवाल किसी अधिकारी को नियमों से ऊपर रखने का नहीं है। सवाल है नियमों के समान अनुपालन का।अगर हर्ष फायरिंग गलत है, तो गलत हर किसी के लिए है। अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है,
तो जांच भी सबकी होनी चाहिए।क्या दशहरे पर सिर्फ आईपीएस अंकिता शर्मा ने ही बिना पुलिस वर्दी के हर्ष फायरिंग की थी? क्या दूसरे जिलों के पुलिस अधीक्षक और वरिष्ठ अधिकारी ऐसे आयोजनों में शामिल नहीं हुए? यदि दूसरे अधिकारियों के भी ऐसे वीडियो मौजूद हैं, तो क्या उन्हें नोटिस जारी किए गए?
कितने अधिकारियों से जवाब मांगा गया? और यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो उसके पीछे क्या आधार है?इन सवालों का जवाब पुलिस विभाग को स्पष्ट रूप से देना चाहिए।अंकिता शर्मा के मामले में भी यदि किसी नियम का उल्लंघन हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लेकिन जांच का दायरा केवल एक अधिकारी तक सीमित रहना भी सवाल खड़े करेगा,
यदि समान परिस्थितियों में दूसरे अधिकारी भी ऐसा कर चुके हों।मुद्दा अंकिता शर्मा को बचाने का नहीं, बल्कि कार्रवाई में समानता सुनिश्चित करने का है।एक अधिकारी महिला है, लोकप्रिय है या छत्तीसगढ़ की बेटी के रूप में पहचानी जाती है — ये बातें अपने आप में किसी को दोषी या निर्दोष साबित नहीं करतीं।
फैसला तथ्यों और नियमों के आधार पर होना चाहिए, न कि लोकप्रियता, पहनावे या व्यक्तिगत छवि के आधार पर।पुलिस विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ नियम लागू करना नहीं, बल्कि यह भरोसा कायम रखना भी है कि नियम सबके लिए बराबर हैं।
*इसलिए सवाल सीधा है —*क्या हर्ष फायरिंग के मामले में सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं?
अगर हां, तो विभाग स्थिति स्पष्ट करे। और अगर नहीं, तो सिर्फ अंकिता शर्मा के मामले में कार्रवाई क्यों?*क्योंकि कानून और अनुशासन की असली कसौटी यही है — एक ही गलती पर एक जैसा पैमाना, चाहे अधिकारी कोई भी हो।*
