बकाया भत्ता, रोजगार और विस्थापन के मुद्दे पर फूटा आक्रोश; कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में 8 सूत्रीय मांगें, कंपनी प्रबंधन को आंदोलन की चेतावनी

डोलकुमार निषाद@सक्ती-डभरा-: वेदांता थर्मल पावर परियोजना से प्रभावित और विस्थापित परिवारों की समस्याएं अब महज आवेदन और आश्वासन तक सीमित रहने वाली नहीं हैं। लंबे समय से बकाया भत्ते, रोजगार और अन्य सुविधाओं को लेकर परेशान प्रभावित परिवारों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है,,। परिवारों ने सक्ती कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल समस्याओं के निराकरण की मांग की है। साथ ही साफ चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो 21 सितंबर 2026 से कंपनी के मुख्य द्वार के सामने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

7 दिन का अल्टीमेटम भी बेअसर..!
प्रभावित परिवारों का कहना है कि 7 सितंबर को कंपनी प्रबंधन से मुलाकात कर सात दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान करने की मांग की गई थी, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। यही वजह है कि अब प्रभावित परिवारों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पूर्व में निर्धारित मासिक भत्ता प्राप्त करने वाले कुछ प्रभावित परिवारों का भुगतान बिना पूर्व सूचना के बंद कर दिया गया। इससे प्रभावित परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

30–35 परिवारों का बकाया भत्ता तत्काल देने की मांग..
ज्ञापन में करीब 30 से 35 परिवारों के बकाया भत्ते का भुगतान करने तथा पात्र परिवारों के नाम सूची में जोड़ने की मांग की गई है। प्रभावित ग्राम सीताराई समेत अन्य प्रभावित गांवों के पात्र परिवारों एवं खातेदारों को कंपनी में रोजगार देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।

रोजगार के नाम पर भी सवाल…
प्रभावित परिवारों ने रेलवे से प्रभावित पात्र परिवारों को बकाया भत्ता, बोनस और रोजगार का लाभ देने की मांग की है। परियोजना क्षेत्र में रहने वाले किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार अलग-अलग भत्ता तथा रोजगार संबंधी लाभ देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

इसके अलावा ज्ञापन में दावा किया गया है कि प्रभावित परिवारों के करीब 27–28 लोगों को ठेकेदारी प्रथा के तहत रोजगार दिया गया है। मांग की गई है कि इन्हें वेदांता थर्मल पावर में स्थायी नौकरी/रोजगार उपलब्ध कराया जाए।

स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की मांग..!
प्रभावित गांवों के स्थानीय ठेकेदारों को उनकी योग्यता के अनुसार ठेकेदारी कार्य में प्राथमिकता देने की मांग भी की गई है। वहीं प्रभावित परिवारों की सभी बकाया राशि और वर्तमान मासिक भत्ते का शीघ्र भुगतान कर भविष्य में मासिक भत्ते का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।

21 सितंबर से कंपनी गेट पर डटेगा आंदोलन..!
ज्ञापन का सबसे अहम और तल्ख हिस्सा आंदोलन की चेतावनी है। प्रभावित परिवारों ने कहा है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो 21 सितंबर 2026, सोमवार से कंपनी के मुख्य द्वार के सामने लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

ज्ञापन में आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी प्रबंधन की होने की बात भी कही गई है।

अब सवाल सिर्फ भत्ते का नहीं, हक और रोजगार का है..!
प्रभावित परिवारों की मांगों से साफ है कि मामला केवल बकाया राशि तक सीमित नहीं है। भत्ता, रोजगार, स्थायी नौकरी, बोनस और स्थानीय लोगों को काम में प्राथमिकता जैसे मुद्दों को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि 21 सितंबर से पहले कंपनी प्रबंधन और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है या फिर कंपनी गेट पर प्रभावित परिवारों का अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू होता है..। ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री, पुलिस अधीक्षक सक्ती, राजस्व विभाग के अधिकारियों, तहसीलदार तथा वेदांता थर्मल पावर प्रबंधन को भी भेजी गई है।

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