डभरा जनपद में सीईओ की कुर्सी का खेल, आदेश हुए पुराने लेकिन चार्ज अब भी ‘वेटिंग’ में!

डोल कुमार निषाद/सक्ती/डभरा:- जनपद पंचायत डभरा में इन दिनों विकास कार्यों से ज्यादा चर्चा सीईओ की कुर्सी और चार्ज को लेकर हो रही है। जनपद पंचायत अध्यक्ष अरुणा महेंद्र सिदार के नेतृत्व में जनपद सदस्यों ने कलेक्टर सक्ती को पत्र सौंपकर ऐसी स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं, जिसमें अधिकारी का स्थानांतरण तो हो गया, लेकिन कुर्सी का चार्ज किसके पास रहेगा–इसका अध्याय अभी तक पूरा नहीं हुआ.!

पत्र के मुताबिक जनपद पंचायत डभरा के सीईओ का स्थानांतरण लगभग दो महीने पहले 16 जून को जिला पंचायत सक्ती में सहायक परियोजना अधिकारी के पद पर किया गया था। वहीं जनपद पंचायत डभरा में उमेश रात्रे का स्थानांतरण किया गया,,। लेकिन जनपद सदस्यों का कहना है कि स्थानांतरण के बाद भी चार्ज का खेल ऐसा चला कि पुराना अधिकारी भारमुक्त नहीं हुआ और नए अधिकारी को पदभार भी नहीं मिला,,।

अब सवाल यह है कि आदेश निकल गया, अधिकारी बदल गया, लेकिन कुर्सी को आखिर किस बात का इंतजार है?
क्या सरकारी कुर्सियों को भी अब चार्ज लेने से पहले शुभ मुहूर्त चाहिए..?

‘चार्ज’ शब्द ने पकड़ा राजनीतिक तापमान!
जनपद सदस्यों ने पत्र में लिखा है कि इस स्थिति से जनपद परिवार में असंतोष का माहौल है और सीईओ आदिले द्वारा चार्ज लेने में देरी की बातें सामने आ रही हैं। इसी नाराजगी के बीच जनपद पंचायत के सदस्यों ने बाकायदा बैठक कर दो दिन का अल्टीमेटम देने का फैसला किया है। पत्र में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि दो दिवस के भीतर नए सीईओ को चार्ज नहीं दिया गया तो जनपद सदस्य आंदोलन का रुख अख्तियार करेंगे।

यानी मामला अब “चार्ज कौन लेगा?” से आगे बढ़कर “चार्ज नहीं मिला तो आंदोलन कौन करेगा?” तक पहुंच चुका है।

जनपद की राजनीति में नया सवाल—फाइल दौड़ रही है या कुर्सी?
सरकारी दफ्तरों में अक्सर फाइलों के धीरे चलने की कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन डभरा जनपद में मामला थोड़ा अलग नजर आ रहा है। यहां स्थानांतरण हो गया, पदस्थापना हो गई, पत्राचार हो गया, जनपद सदस्यों ने हस्ताक्षर भी कर दिए… लेकिन चार्ज अब भी ‘वेटिंग लिस्ट’ में!

जनपद सदस्यों के हस्ताक्षरों से भरा यह पत्र अब कलेक्टर कार्यालय पहुंच चुका है,,। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि पहले चार्ज मिलता है या आंदोलन का बिगुल बजता है,,,।

फिलहाल डभरा जनपद की जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है—“साहब का ट्रांसफर तो हो गया, नए साहब आ भी गए… फिर आखिर चार्ज किसके इंतजार में बैठा है?”

अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि डभरा जनपद की इस ‘चार्ज कथा’ का अगला अध्याय कब लिखा जाता है।

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