रायपुर। छत्तीसगढ़ की मेलोडी क्वीन शर्मिला विश्वास ने सोशल मीडिया पर एक ऐसी मांग उठाई है, जिसने प्रदेशभर के संगीत प्रेमियों के बीच नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री के लिए छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गायक नितिन दुबे के नाम पर विचार करने की अपील की है। उनके इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर हजारों प्रशंसकों ने समर्थन जताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि छत्तीसगढ़ी संगीत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले कलाकार को देश का सम्मान मिले।
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नितिन दुबे आज छत्तीसगढ़ी संगीत जगत का ऐसा नाम हैं, जिन्हें किसी परिचय की जरूरत नहीं। लगभग 35 वर्षों से संगीत साधना में जुटे नितिन दुबे ने महज 7 वर्ष की उम्र में बाल कलाकार के रूप में अपनी संगीत यात्रा शुरू की थी। वर्ष 2001 में “तैं दीवानी मैं दीवाना” और “मनमोहिनी हे गांव के गोरिया” से करियर की शुरुआत करने वाले नितिन दुबे को वर्ष 2005 में आए सुपरहिट गीत “हाय मोर चांदनी” ने घर-घर पहचान दिलाई।
इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। रायगढ़ वाला राजा, चंदा रे, का तैं रूप निखारे चंदैनी, ये गोंदा तोला रे, नीलपरी सहित अनेक सुपरहिट गीतों ने उन्हें छत्तीसगढ़ी संगीत का सबसे लोकप्रिय चेहरा बना दिया। उनके भक्ति गीत प्रथम वंदना, गौरी के लाला, चंद्रसेनी अमर कथा और मेरे मन में है राम भी लाखों श्रद्धालुओं की पसंद बने।
सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में भी नितिन दुबे अपने लाइव स्टेज शो और भजन संध्याओं से दर्शकों का दिल जीत चुके हैं। अब तक वे 2500 से अधिक लाइव स्टेज कार्यक्रम कर चुके हैं। वर्ष 2013 में उन्होंने बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर और साधना सरगम के साथ “साई का सजदा” एल्बम में भी अपनी आवाज़ दी, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली।
डिजिटल दौर में भी नितिन दुबे का जादू बरकरार है। उनका आधिकारिक यूट्यूब चैनल छत्तीसगढ़ी संगीत के सबसे लोकप्रिय चैनलों में गिना जाता है और उस पर 10 लाख (1 मिलियन) से अधिक सब्सक्राइबर हैं। उनके अनेक गीत करोड़ों बार देखे और सुने जा चुके हैं तथा लगभग हर नया गीत मिलियन व्यूज़ के क्लब में शामिल होता है।
नितिन दुबे को उनके योगदान के लिए माटी रत्न, कला अनमोल रत्न, साई आराधना सम्मान और छत्तीसगढ़ मेलोडी किंग अवॉर्ड सहित कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
इसी उपलब्धियों को आधार बनाते हुए अब सोशल मीडिया पर यह मांग तेज हो रही है कि जिस कलाकार ने दशकों तक छत्तीसगढ़ की भाषा, संस्कृति और लोकसंगीत को देशभर में नई पहचान दिलाई, उसे पद्मश्री जैसे राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया जाना चाहिए। हालांकि, यह मांग फिलहाल सोशल मीडिया और प्रशंसकों की ओर से उठाई गई अपील है; पद्म पुरस्कारों का अंतिम निर्णय भारत सरकार की निर्धारित चयन प्रक्रिया के अनुसार होता है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि सोशल मीडिया से उठी यह आवाज़ आने वाले समय में कितना असर छोड़ती है। लेकिन इतना तय है कि नितिन दुबे ने अपने सुरों से छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और यही वजह है कि उनके चाहने वाले उन्हें राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित होते देखना चाहते हैं।
