डोलकुमार निषाद@डभरा-: तकनीक और विज्ञान के इस दौर में भी समाज का एक बड़ा वर्ग अफवाहों और अंधविश्वासों से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है। डभरा और ठनगन सीमा पर स्थित कथित रहस्यमयी आवाज वाले मकान का मामला इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है।। पिछले कई दिनों से क्षेत्र के लोग पिकअप, ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों में सवार होकर दूर-दूर के गांवों से उक्त मकान तक पहुंच रहे हैं। लोग घंटों तक वहां रुककर कथित आवाज सुनने और अपनी आंखों से सच्चाई देखने का प्रयास कर रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि वर्तमान समय खेती-किसानी और कृषि कार्यों का महत्वपूर्ण मौसम है। किसानों और ग्रामीणों के पास खेतों में काम की कोई कमी नहीं है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अपने दैनिक कार्यों और जिम्मेदारियों को छोड़कर अफवाहों और अंधविश्वास से जुड़ी बातों में रुचि लेते दिखाई दे रहे हैं।
समाज के प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि किसी भी घटना को अलौकिक या रहस्यमयी मानने से पहले उसके वैज्ञानिक और वास्तविक कारणों को समझने का प्रयास किया जाना चाहिए। कई बार प्राकृतिक कारणों से उत्पन्न होने वाली घटनाओं को अफवाह और कल्पनाओं के माध्यम से रहस्य का रूप दे दिया जाता है, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है।
यह घटना हम सभी के लिए एक संदेश भी है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो, फोटो और संदेशों पर आंख बंद कर विश्वास न करें। किसी भी जानकारी को सत्य मानने से पहले उसकी जांच और पुष्टि अवश्य करें।
जागरूक समाज वही है जो तथ्यों, विज्ञान और तर्क के आधार पर निर्णय लेता है, न कि अफवाहों और अंधविश्वासों के आधार पर। यदि हम सभी जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें, तो समाज में फैलने वाली भ्रामक जानकारियों और अफवाहों पर आसानी से रोक लगाई जा सकती है,,।
“अफवाहों से सावधान रहें, तथ्यों पर विश्वास करें। किसी भी वीडियो या सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। विज्ञान और तर्कसंगत सोच ही जागरूक समाज की पहचान है।“
