“जिस आवाज को लोग समझ रहे थे आत्मा का साया, वह निकली खिड़की और हवा की जुगलबंदी!”
डोलकुमार निषाद@डभरा-: डभरा क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित रूप से एक महिला के रोने जैसी आवाज सुनाई दे रही थी, जिसके बाद आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में तरह-तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। स्थिति ऐसी बन गई कि लोग सुबह से लेकर देर रात तक उस मकान के पास पहुंचकर वीडियो में सुनाई दे रही आवाज को सुनने और सच्चाई जानने के लिए जुटने लगे।

पूरा मामला नगर पंचायत डभरा एवं ग्राम पंचायत ठनगन की सीमा पर स्थित एक नव-निर्मित मकान का है। जानकारी के अनुसार मकान की खिड़कियों से हवा अंदर प्रवेश करने पर एक अजीब प्रकार की आवाज उत्पन्न होती है। कुछ शरारती और नादान युवकों ने इसी आवाज का वीडियो बनाकर उसमें एडिटिंग के माध्यम से महिला के रोने जैसी आवाज जोड़ दी और उसे सोशल मीडिया में प्रसारित कर दिया।

वीडियो वायरल होते ही क्षेत्र में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया और लोग इसे रहस्यमयी घटना मानने लगे। कई लोग तो दूर-दराज के गांवों से भी इस कथित आवाज को सुनने और सच्चाई जानने के लिए मौके पर पहुंचने लगे। हालांकि बाद में स्थानीय लोगों की जानकारी और वास्तविक स्थिति सामने आने पर स्पष्ट हुआ कि आवाज का कारण केवल हवा के दबाव से उत्पन्न ध्वनि थी, न कि किसी प्रकार की अलौकिक या रहस्यमयी घटना।

बताया जाता है कि उक्त मकान का निर्माण मकान मालिक ने अपने बेटे की शादी के उद्देश्य से जल्दबाजी में कराया था। बेटे के विवाह के बाद परिवार पुनः झारखंड लौट गया, जहां मकान मालिक नौकरी करता है। इसी कारण से मकान लंबे समय से खाली पड़ा हुआ है और वर्तमान में वहां कोई निवास नहीं करता।
हैरानी की बात यह है कि कुछ यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने भी इस कथित वीडियो को बिना किसी तथ्यात्मक जांच और पुष्टि के अपने प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर दिया, जिससे अफवाह और अधिक फैल गई। डिजिटल और सोशल मीडिया के इस दौर में कंटेंट क्रिएटर्स और यूट्यूब संचालकों की भी जिम्मेदारी बनती है कि किसी भी वीडियो या सूचना को प्रसारित करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच अवश्य करें, ताकि समाज में भ्रम, अंधविश्वास और अनावश्यक भय का माहौल उत्पन्न न हो।
हमारे माध्यम से सभी यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया संचालकों एवं आम नागरिकों से अपील है कि किसी भी वायरल वीडियो या सूचना को बिना सत्यापन के साझा न करें। जिम्मेदार पत्रकारिता और जिम्मेदार सोशल मीडिया उपयोग ही अफवाहों पर अंकुश लगाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
स्थानीय लोगों ने भी अब वायरल वीडियो को केवल शरारत और भ्रामक जानकारी फैलाने का प्रयास बताया है तथा लोगों से सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या सूचना को सत्यापित किए बिना साझा नहीं करने की अपील की है।
यह मामला एक बार फिर यह संदेश देता है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो और संदेशों की सत्यता की जांच किए बिना उन पर विश्वास नहीं करना चाहिए। अफवाहें और भ्रामक जानकारियां समाज में भ्रम और अनावश्यक भय का कारण बन सकती हैं।
फिलहाल क्षेत्र में वायरल वीडियो की चर्चा जरूर है, लेकिन अब सच्चाई सामने आने के बाद लोगों के चेहरे पर मुस्कान और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
