
सूरज बीसी गरियाबंद
देवभोग :- वर्षा ऋतु की सौंदर्य, उमंग और सांस्कृतिक भावनाओं को समर्पित पावस प्रसंग में 8 वर्षीय बाल नृत्यांगना आशिका सिंघल की मनमोहक कथक प्रस्तुति कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। अपनी भावपूर्ण अभिव्यक्ति, लयकारी और प्रभावशाली नृत्य शैली से आशिका ने उपस्थित दर्शकों एवं कला-प्रेमियों की खूब सराहना बटोरी।राजकुमार कॉलेज, रायपुर की कक्षा तीसरी की छात्रा आशिका सिंघल ने मात्र 4 वर्ष की आयु से कथक का नियमित प्रशिक्षण प्रारंभ किया है। वे अपनी कथक गुरु सुश्री नेहा सिंह के मार्गदर्शन में निरंतर साधना कर रही हैं। वर्तमान में वे चंडीगढ़ विश्वविद्यालय की कथक आध्यात्मिक परीक्षा की तैयारी कर रही हैं तथा प्रथम वर्ष में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुकी हैं।पावस प्रसंग में आशिका ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत ‘जय-जय जगतजननी देवी…’ स्तुति से की। इसके पश्चात उन्होंने कथक के पारंपरिक अंगों तोड़ा, टुकड़ा, आमद और तत्कार की विविध प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

उनकी प्रस्तुति में लय, ताल, पद संचालन और भाव-भंगिमाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला।कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा आशिका द्वारा प्रस्तुत नृत्य-नाटिका, जिसमें उन्होंने श्रीकृष्ण और राधा-रानी के होली-रास का जीवंत एवं मनोहारी मंचन किया। नृत्य के माध्यम से राधा-कृष्ण के प्रेम, उमंग और होली के उल्लास को उन्होंने अत्यंत सहज और प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। उनकी भाव-भंगिमाओं और मंचीय आत्मविश्वास ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।आशिका इससे पहले राज्योत्सव एवं 40वें चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंचों पर भी अपनी कथक प्रस्तुति दे चुकी हैं। कम उम्र में लगातार बड़े मंचों पर प्रस्तुति देना उनकी प्रतिभा, अनुशासन और कला के प्रति समर्पण को दर्शाता है।पावस प्रसंग में आशिका की प्रस्तुति ने यह संदेश भी दिया कि नई पीढ़ी के बाल कलाकार भारतीय शास्त्रीय कलाओं की समृद्ध परंपरा को उत्साह और समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। ताल, लय, भाव और अभिनय के सुंदर संगम से सजी आशिका सिंघल की कथक प्रस्तुति ने पावस प्रसंग को यादगार बना दिया।
