प्राचार्य के लिए आरक्षित आवास में एक माह से परिवार सहित रह रही महिला नेत्री

जांजगीर-चांपा-: जिला मुख्यालय जांजगीर स्थित शासकीय जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाईट) परिसर में शासकीय आवासों पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि संस्थान के प्राचार्य के लिए आरक्षित शासकीय आवास पर एक भाजपा नेत्री ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और करीब एक माह से वहां अपने परिवार सहित निवास कर रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मामले के बावजूद संस्थान प्रबंधन और प्रशासनिक अमला अब तक मूकदर्शक बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार उक्त महिला नेत्री ने शासकीय आवास के बाहर महिला स्व-सहायता समूह का बोर्ड लगाकर वहां रहना शुरू कर दिया है। जबकि, यह आवास विशेष रूप से संस्थान के प्राचार्य के लिए आरक्षित है, लेकिन इसके बावजूद उस पर कब्जा कर लिया गया है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जहां एक ओर संस्थान में द्वि-वर्षीय डीएड प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं को छात्रावास या शासकीय आवास की सुविधा नहीं मिल पा रही है और वे मजबूरी में किराए के मकानों में रह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शासकीय आवास पर इस प्रकार का अवैध कब्जा प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। सूत्रों के अनुसार उक्त महिला नेत्री द्वारा संस्थान के कन्या छात्रावास में लगे बोरवेल से पानी लेकर उसका उपयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने कथित रूप से गलत तरीके से विद्युत कनेक्शन लेकर एसी, पंखा, लाइट और फ्रिज जैसे उपकरणों का उपयोग भी शुरू कर दिया है। इससे न केवल शासकीय संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है बल्कि यह नियमों की खुली अनदेखी भी है।

मंत्रालय से आवास आवंटन कराने का दावा

बताया जा रहा है कि आम लोगों में भ्रम फैलाने के लिए महिला नेत्री द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि उक्त शासकीय आवास का आवंटन उन्होंने मंत्रालय रायपुर से कराया है। जबकि, नियमों के अनुसार इस संस्थान के परिसर में स्थित सभी शासकीय आवासों के आवंटन का अधिकार केवल शासकीय जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जांजगीर के प्राचार्य को ही है। ऐसे में उनके दावे की सत्यता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

स्थानीय लोगों और शिक्षण संस्थान से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा शासकीय आवास पर कब्जा किया गया है तो संस्थान प्रबंधन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन अब तक प्राचार्य और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया है, जिससे कई तरह की चर्चाएं और सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह मामला शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि शासकीय परिसरों में ही नियमों की खुलेआम अवहेलना होने लगे और जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बचते रहें, तो यह व्यवस्था की कमजोरी को ही दर्शाता है।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी लोगों की निगाहें

खैर, अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर शासकीय आवास को कब्जे से मुक्त कराने के लिए क्या कदम उठाता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा।

सुलगते हुए सवाल

1- क्या शासकीय आवास का आवंटन नियमों के विरुद्ध किया गया है?

2- यदि आवंटन नहीं हुआ तो अवैध कब्जे पर कार्रवाई क्यों नहीं?

3- क्या प्रशासन किसी दबाव में कार्रवाई से बच रहा है?

क्या कहते हैं नियम

शासकीय जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर के आवासों का आवंटन संस्थान के प्राचार्य द्वारा किया जाता है।

बिना विधिवत आदेश के किसी भी बाहरी व्यक्ति का निवास अवैध कब्जा माना जाता है।

शासकीय बिजली-पानी का निजी उपयोग नियमों का उल्लंघन है।

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