डोलकुमार निषाद

सक्ति :- जिले के डभरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम साराडीह के होनहार चिकित्सक डॉ. हेमंत जायसवाल ने MD (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी) की तीन वर्ष की कठिन पढ़ाई सफलतापूर्वक पूर्ण कर परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। इस उपलब्धि के साथ ही वे क्षेत्र के पहले कैंसर रोग विशेषज्ञ बन गए हैं, जो निश्चित रूप से चिकित्सा जगत और आमजन के लिए गर्व की बात है।

शिक्षा और सफलता की राह

डॉ. हेमंत जायसवाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ही गांव साराडीह से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल मेडिकल कॉलेज, रायगढ़ से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ाते हुए उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, रायपुर से MD (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी) की डिग्री प्राप्त की।

उनकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से क्षेत्र के लोगों को एक नई उम्मीद मिली है, क्योंकि अब कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए मरीजों को दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। डॉ. जायसवाल की इस सफलता से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले में हर्ष का माहौल है। स्थानीय लोग एवं चिकित्सा जगत से जुड़े विशेषज्ञ उनकी इस उपलब्धि की सराहना कर रहे हैं।

परिवार और गुरुजनों का आशीर्वाद

डॉ. जायसवाल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और सभी बड़ों के आशीर्वाद को दिया है। उन्होंने कहा कि उनके इस सफर में उनके परिवार का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने हर कदम पर उन्हें प्रोत्साहित किया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

विधायक रामकुमार यादव ने दी बधाई

चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव ने डॉ. हेमंत जायसवाल को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया आयाम देने के साथ-साथ क्षेत्रवासियों के लिए भी गर्व की बात है। उन्होंने कहा,

“चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र मेरा एक परिवार है, और मेरे परिवार के एक भाई ने आज कैंसर रोग विशेषज्ञ बनने की उपलब्धि हासिल की, यह अत्यंत गर्व की बात है। यह हमारे क्षेत्र के युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मैं चाहता हूं कि मेरे क्षेत्र के सभी भाई-बहन भी इसी तरह सफलता प्राप्त करें। डॉक्टर हेमंत जायसवाल और उनके पूरे परिवार को मेरी ओर से ढेर सारी बधाई एवं शुभकामनाएं।”

क्षेत्र को मिलेगी नई स्वास्थ्य सुविधा

डॉ. जायसवाल की इस सफलता से अब आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर के इलाज के लिए बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे क्षेत्रीय मरीजों को बड़े शहरों की ओर रुख करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।

उनकी यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा सेवाओं को एक नया आयाम देगी, बल्कि युवा विद्यार्थियों को भी प्रेरित करेगी कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो हर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

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